क्या ठाकरे गलत हैं?

अभी कुछ दिन पूर्व समाचारों मे एक खबर आई कि बाला साहब ठाकरे ने FM चैनलों को कहा कि वो मराठी गीतों को भी अपने यहाँ स्थान दें। इसके तुरन्त बाद मनसे (राज ठाकरे) का समर्थन इस मुद्दे को प्राप्त हुआ।

दुर्भाग्य से यह खबर बजाय सही संदर्भ एवं सही वातावरण मे देने के, ऐसा महौल बना कर प्रस्तुत किया गया जैसे कि बाला साहब ने राष्ट्र राज्य के विरुद्ध कोइ युद्ध छेड दिया हो। इसका वही असर हुआ जैसा अखबार वाले चाहते थे - ठाकरे परिवार पर आक्षेपों की बौछार से टिप्पणीयां भर गईं। किसी ने भी अपने अक्ल का इस्तेमाल नही किया न सोचा कि ठाकरे परिवार ने आखिर गलत क्या कहा?

१. उन्होने मुम्बई (एक महाराष्ट्रनीत शहर) मे मराठी गीतों कि माँग रखी है, किसी दूसरे राज्य मे नहीं। आखिर अपनी विरासत एवं संस्कृति की रक्षा हमें स्वयं करनी होगी, किसी बाहरी से हम इसकी अपेक्षा नहीं कर सकते हैं।

२. FM चैनल पर मराठी गीत "भी" बजाने के लिये बोला है, मराठी गीत "ही" बजाने के लिए नही।

कोई यह भी तो सोचे कि आखिर ऐसी नौबत आई क्यों? क्यों मौका दिया FM चैनल के मालिकों ने किसी को उन्हे टोकने का? क्य यह निर्णय स्वयं नही ले सकते थे? पर यहाँ व्यावसिकता आडे आती है। तब ऐसे में जबकि चैनल स्वयं प्रेरणा से कोइ निर्णय नही लेत, सरकारें भी कुछ नही करती तब तक किसी को तो आगे आना ही होगा।

यह हमारा सौभाग्य है कि ठाकरे परिवार हमारे मध्य है और उन्होने इस मुद्दे को उठाया।
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2 comments:

indrajeet pandey said...

wah sir wah...

आलोक मोहन said...

अगर बिहार मे भोजपुरी बज सकते है
तो यहा मराथी क्यो नही

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