ब्लैकबेरी सेवाएं कितनी सुरक्षित

मोबाईल जगत में ब्लैकबेरी की सेवाएं काफी सुरक्षित मानी जाती हैं। परंतु कुछ दिन पूर्व हुए ब्लैकबेरी के अधिकारियों की गृहमंत्रालय के अधिकारियों के साथ की बैठक संभवतः हमे अपनी सोच बदलने पर मज़बूर कर सकती है। समाचार पत्र दैनिक जागरण के अनुसार ब्लैकबेरी की हैकिंग संभव है।

खबर पढ़ें http://in.jagran.yahoo.com/news/business/general/1_12_6652169.html

हैकिंग आज के युग मे एक अति सामान्य सा शब्द है और कोइ भी इस बात को दावे के साथ नही कह सकता कि उसकी सेवाएं सदैव ही सुरक्षित रहेगी कभी हैक नही होगी। तो फिर मै इस बात को लेकर इतना परेशान क्यों हूं या इसे मुद्दा क्यों बना रहा हूं। क्योंकि मेरी परेशानी ब्लैकबेरी सेवाओं की हैकिंग से नही अपितु RIM के द्वारा इसको सरलता से स्वीकार करने से है। यहाँ तक की वो हमारे अधिकारियों को संकेत देने से बाज़ नही आए कि US मे ऐसा ही हो रहा है और आप भी ऐसा करें। इस meeting के बाद गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को SMS भी आता है कि संदेश प्रेषक यह सुविधा भारत सरकार को दे सकता है।

ऐसे मे मेरे सम्मुख कुछ प्रश्न उठ खडे होते हैं:-

जब ब्लैकबेरी को यह ज्ञात है कि USA एवं अन्य देशो ने हैकर्स को इनका code क्रैक करने की नौकरी पर लगाया है, अर्थात वो जानते हैं कि उनके सुरक्षा घेरे मे छिद्र है।
अपने व्यवसाय पर विपरीत असर न पडे इस हेतु RIM इन हैकर्स के विरुद्ध कोई कदम नही उठा रही है और हैकर्स को सुरक्षा से खेलने का मौका दे रही है।
निश्चित तौर पर जब ब्लैकबेरी अपनी सूचना किसी से साझा नही कर रहा है ऐसे मे सरकारे तो अपने हैकर्स की पहचान उनको बताने से रहा। ऐसेमे RIM को कैसे मलूम पडेगा कि कौन सा हैकर सरकार के लिये काम कर रहा है और कौन सा आतंकवादियों के लिये? कुछ तो प्रतिद्वंदी कंपनियो के सूचना को पाने के लिए भी रखे गए होगें।
बैकबेरी ने अपनी सेवा की सुरक्षा वैश्षयठ्यता पर इतना जोर दिया और उसका इतना प्रचार किया है कि लोग अपने व्यवसाय से संबंधित संवेदनशील जानकारी भी इससे भेजते है जो कि जोखिम भरा हो सकता है।
अभी कुछ समय पूर्व TOI मे खबर आई थी कि एक कंपनी मे चीन ने अपने जासूस कर्मचारी के रूप मे लगा रखे थे, उन्होने कुछ ऐसी हि संवेदनशील जानकारी अपने आकाओ तक पहुंचाई जिससे वो फर्म आस्ट्रेलिया मे एक bid हार गई। चीन की ऐसी हरकतों एवं cyber war मे उसका प्रतिदिन बढता role हमे सोचने पर मजबूर करता है।
इन सबके मध्य खबर आ रही है कि ब्लैकबेरी के सामने सरकार ने घुटने टेक दिए हैं, अब हमारी सुरक्षा हमारे हाथ मे ही है।

14 comments:

jay said...

बहुत बढियां ...शानादार. सबसे अच्छा इस ब्लॉग की साज़-सज्जा लगी.
पंकज झा.

Ravindra Nath said...

मै साज सज्जा मे बिल्कुल शून्य हूँ, यह मेरी बहन का कमाल है।

दीर्घतमा said...

बिषय बहुत अच्छा उठाया है हमें सतर्कता की आवस्यकता भी है लेकिन हम तो केवल देख रहे है ,देखते रहेगे देश को जगाने की जरुरत.बहुत-बहुत धन्यवाद.

Rakesh said...

Wow.. ur blog looks stunning.... Good desing & concept.....

by the way who is the web designer

- Rakesh

Ravindra Nath said...

Rakesh, I will send you her contact details, you can suggest your friends her name for web design.

आलोक मोहन said...

aaj bharat ek mobile ka bada market hai
so aaj bahut saari comapny aaj yaha aa rehi hai
uhne lagta hai bharat me wo paise deker kuch bhi ker lege
sarkar bhale hi ghutne take de per hame saterk rehna hoga

bahut hi acchi jankari

Gourav Agrawal said...

अच्छा विषय अच्छी पोस्ट अच्छा ब्लॉग
सही कहा "अब हमारी सुरक्षा हमारे हाथ मे ही है।"
आभार :)

abhishek1502 said...

nice post

abhishek1502 said...

रविन्द्र जी , आप अनवर जमाल के ब्लाग का निषेध करे .क्यों की एक कहावत है
कुत्ते की दुम चाहे कितनी भी कोसिस करो टेडी ही रहेगी .ये बात आप को भी जल्द समझ में आ जाएगी

abhishek1502 said...

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abhishek1502 said...

ऊपर दिया गया लिंक जरुर पढ़े .या जानकारियां न सिर्फ आप के काम आएँगी अपितु कुतर्कियो को आप मू तोड़ जवाब दे सकेंगे .पूरी किताब बेहद ज्ञानवर्धक है .

ZEAL said...

Great post !...We certainly need to be cautious. We are nomore safe anywhere in this world.

Umra Quaidi said...

लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

http://umraquaidi.blogspot.com/

उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”

abhishek1502 said...

@रविन्द्र जी
आप को मैंने पहले भी इस जमालगोटे की नियत के बारे में बताया था .
सूअर से कुश्ती नही लड़नी चाहिए . इस के दो कारण है
(१)आप के कपडे गंदे हो जायेंगे .
(२)इस से भी बड़ा कारण यह है की सूअर को मज़ा आएगी

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