समाज़ मे बढती असमानता

हमारे देश को स्वतंत्र कराते समय हमारे वीर सेनानियों के मन मे एक समता मूलक समाज की तस्वीर थी, उन्होने सोचा था कि इस देश मे सब सुख से रहेंगे, अमीर गरीब का अंतर बहुत बडी खाई की तरह नही होगा। पर आज हम क्या देखते हैं - दो दिन के अंतर पर दो ऐसी शादियां वो भी निकट के राज्यों मे, एक मे कुल अनुमानित खर्च आया २५० करोड रुपये (कांग्रेस नेता ने शादी में उडाए 250 करोड ) जबकि १४५ देशों का GDP इससे कम है। यह शादी संपन्न हुई २८ फरवरी को, इसके ठीक दो दिन बाद यानी २ मार्च को एक शादी होती है और उसमे सिर्फ इसलिए विघ्न पडता है क्योंकि १५ की जगह २५ बाराती आ गये थे।

ऐसे मे कया यह प्रश्न उठना स्वाभाविक नही है कि इस प्रकार के भोंडे प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए जहां पर हमारे दो नागरिकों के मध्य असमानता इतने विद्रूप रूप मे हमारे समक्ष आ कर दिखाई दे। ऐसी असमानताएं अक्सर लोगों को गलत मार्ग की तरफ धकेलती हैं वे भी कोशिश करते हैं कि होड ले सकें इन धनपतियों से और अपना जलवा कायम कर सकें समाज़ मे।
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